दहेज प्रथा & Dowry System: न दहेज लें और न ही दहेज देने का संकल्प लें

हमारे महान समाज सुधारकों ने इस देश से बहुत सारी कुरीतियों जैसे सती-प्रथा, बाल-विवाह, कन्या भ्रूण हत्या इत्यादि को तो लगभग समाप्त कर दिया लेकिन कुछ कुरीतियां आज भी जीवित है |  

कुछ ऐसी ही कहानी है अहमदाबाद की रहने वाली आयशा की।

आयशा की जिंदगी में वह सब कुछ था जो एक मानव के जीवन में आवश्यक है। एक खुशहाल परिवार से संबंध रखने वाली आयशा को उसके पति और ससुराल जनों द्वारा इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वह अंत में एक नदी में कूदकर अपनी जान दे देती है। अपने ससुराल वालों के साथ रहने की बजाए उसको अपनी जीवन लीला समाप्त करना ज्यादा आसान लगा। इस पूरी घटना के पीछे का कारण दहेज प्रताड़ना बताया जा रहा है। आखिर कब तक मौत का यह सिलसिला चलता रहेगा। आखिर कब तक समाज इस पर मौन रहेगा। आखिर कब तक हमारी बहन बेटियां अपनी जीवन लीला समाप्त करने पर मजबूर होती रहेंगी। जरा सोचिए!


*आइए, इस दहेज प्रथा विरोधी मुहिम का हिस्सा बनिए और प्रण लीजिए कि ना दहेज लेंगे, ना ही दहेज देंगे। इस प्रकार आप अपने देश को एक और विभत्स कुरीति से मुक्ति दिला सकते हैं। जय हिन्द!*

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