Heart Attack: हेल्दी इंसान को भी हो सकता है, जानिए कारण और उपचार |

Heart Attack: हेल्दी इंसान को भी हो सकता है हार्ट अटैक, जानिए कारण और उपचार |

स्मोकिंग की आदत दिल के दौरे का प्रमुख कारण है।

Heart Attack तंदुरुस्त इनसान को हार्ट अटैक आने के लिए कई कारण जिम्मेदार है जिसे हम अपनी नीजी जिंदगी में रोज़ नज़रअंदाज करते हैं। आप जानते हैं कि गंभीर बीमारियों की चपेट में आने के लिए हमारा खान-पान और अवेयरनेस जिम्मेदार नहीं है।

हार्ट अटैक आने के प्रमुख कारण:

(i) स्मोकिंग की आदत दिल के दौरे का प्रमुख कारण

स्मोकिंग और तंबाकू से आपकी सारी फिटनेस प्रभावित होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक स्मोकिंग और तंबाकू हार्ट अटैक का कारण बनता है।

(ii) ब्लड प्रेशर का बढ़ना हार्ट अटैक का कारण:

ब्लड प्रेशर बढ़ने से दिल का दौरा पड़ने के आसार बढ़ जाते हैं। बीपी हार्ट को कंट्रोल करने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचता है। चिकित्सकों के मुताबिक मोटापा, हाई कॉलेस्ट्रोल, डायबिटीज के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती है।

(iii) मोटापा भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है:

मोटापे सेहत के साथ खिलवाड़ है। मोटापे की वजह से बॉडी को बहुत नुकसान पहुंचता है, ब्लड कॉलेस्ट्रोल लेवल बढ़ता है। डायबिटीज और हार्ट अटैक का कानेक्शन भी मोटापे से है।

कैसे दूर करें हार्ट अटैक का खतरा:

  • बड़ी बीमारियों से बचना हैं तो मोटापा कंट्रोल करें।
  • कुछ लोग वर्क लोड की वजह से हमेशा तनाव में रहते हैं, तनाव आपको बीमार बनाता है। काम को मन मारकर करने की जगह एंज्वाय से करना शुरू कर दीजिए। आपका मन और तन दोनों तंदुरुस्त रहेंगे। आप पर काम का स्ट्रेस नहीं रहेगा तो आप ज्यादा अच्छे से अपना काम कर सकते हैं।
  • कामकाजी लोग वर्कलोड, टारगेट और जिंदगी के बीच संतुलन नहीं बना पाते। टारगेट अचीव करने का मतलब खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं है। आप स्मार्ट वर्क से भी टारगेट अचीव कर सकते हैं। ऑफिस में खुद को एंटरटेन करें। निगेटिव सोच के लोगों से दोस्ती करने से बचें।
  • नींद और एक्सरसाइज दोनों आपको दिल की समस्याओं से निजात दिलाएंगी। हेल्थ को ‘हां’ और स्ट्रेस को ‘ना’ कहें।
  • एक्सपर्ट के मुताबिक कई लोग अनुवांशिक कारणों से भी हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं। इस बीमारी के लिए फैमिली हिस्ट्री भी मायने रखती है। जिन लोगों के परिजन, भाई-बहन या बुजुर्गों में ऐसी समस्या होती है, उन्हें खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पुरुषों में 55 और महिलाओं में 65 साल की आयु में इसका खतरा बढ़ जाता है।

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