Real Life Story, True Love Story, Love Of Village Countryside

Love Story ! प्रेमकथा ! पहला प्यार दिल पे वार ! First love heart pe war ! गांव देहात का प्यार ! Love of village countryside ! Story ! Real Life Story ! True Love !दिल से दिल तक(Heart to heart)

एक करपी गांव का लड़का था जिसका नाम था दीपक, ओ इंटर का एग्जाम देकर पटना चला गया और वह वहां जाकर मेडिकल में काम करने लगा,दीपक जिस रूम में रहता था उस रूम के मालिक के बेटी जिसका नाम अनन्या थी, जो उसके रूम में कभी-कभी आया करते थी,

अन्यान्य शहर के रहने वाली थी इसीलिए वह बोलने चालने में थोड़ा भी नहीं हिचकीचाती थी, बेचारा दीपक वो तो गांव का रहने वाला था और वह मासूम और शर्मिला था, जब अनन्या उसके रूम में जाती थी तो सिर्फ अन्याय बोलती रहती थी, क्योंकि दीपक बेचारा बहुत उससे लाजाता था / फिर कुछ दिनों में धीरे-धीरे धीरे-धीरे अनन्या और दीपक मैं बातचीत शुरू हो गई और अनन्या कभी-कभी दीपक का खाना भी बना देने लगी, फिर धीरे-धीरे दीपक और अनन्या एक दूसरे को चाहने लगे और एक दूसरे के साथ रहना,बोलना, चालना पसंद करने लगे, अनन्या दीपक को मेडिकल पर से आने का इंतजार करने लगी और दीपक भी जल्द ही शाम को घर लौटने के लिए जल्दी – जल्दी काम समाप्त कर अनन्या से मिलने के लिए उत्सुक रहता था /

दीपक उसके बारे में सोच कर मन ही मन मुस्कुराता रहता था तो मेडिकल पर के कुछ लोग उसे केयर करते और वह पूछते थे क्यों दीपक आज बहुत खुश नजर आ रहे हो क्या कुछ बात है तो दीपक बोलता था, नहीं वह तो ऐसे ही, एक दिन की बात है जब दीपक बीमार था तो अनन्या वह अपने पिता से छुपकर दीपक से रात 8:00 बजे उसे मिलने आए, तो उसी रात अनन्या के माता पिता उसे दीपक के कमरे में से बाहर निकलते हुए देख लिए और अनन्या से पूछने लगे कि तुम दीपक के रूम में क्या करने गई थी,

अन्यान्य बिचारी डरी हुई थी और डरते डरते उसने बोली कि दीपक का तबीयत खराब था, इसीलिए मैं उसे देखने गई थी, उस दिन अनन्या के माता पिता उसे बहुत डांटे और बोले कि आज के बाद तुम उससे नहीं मिलोगी, अनन्या रोने लगी और बोली कि ठीक है पापा नहीं मिलूंगी, फिर भी अनन्या दीपक से चुपके-चुपके मिलती-जुलती रहती थी /

फिर अचानक दीपक अपने स्कूल का फॉर्म भरने के लिए वापस गांव आता है,तो उसकी मां बोलती है कि अब तू काम करने मेडिकल पर नहीं जाएगा, अब तो गांव में ही रह कर पढ़ाई करेगा,तो दीपक बोलता है कि ठीक है मां जी मैं अब गांव में ही रह कर पढ़ाई करूंगा / फिर कुछ दिनों बाद अनन्या दीपक को फोन करती है और कहती है कि दीपक तुम कब आओगे तुम्हारे बिना हमें मन नहीं लग रहा है / तो दीपक बोलता है की मैं अब नहीं आऊंगा,

मैं अब गांव में ही रह कर पढ़ाई करूंगा, तो अनन्या बोलती है ठीक है दीपक जैसी आपकी मर्जी, फिर भी वह दोनों एक दूसरे से थोड़ा बहुत बातचीत करते रहते थे, एक दिन अचानक अनन्या बोली कि दीपक क्या तुम मुझसे मिलने आ सकते हो, तो दीपक बेचारा सोचने लगा फिर उसने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं है, तो मैं कैसे मिलने के लिए आऊ, तो अनन्या बोलती है कोई बात नहीं दीपक, तुम सिर्फ आने का खर्च का इंतजाम करो, मैं तुम्हें जाने के लिए पैसे दे दूंगी,

दीपक बोला, ठीक है तुम कह रही हो तो मैं आऊंगा, मगर कहां आना है, तो अन्यान्य बोली की पटना चिड़ियाघर के पास तुम आना मैं वहीं पर तुम्हें मिलूंगी, फिर दीपक घर का बकरी ₹300 में बेचकर, अनन्या से मिलने चला गया और वह चिड़िया घर के पास पहुंच कर अनन्या को कॉल किया मगर कोई कॉल रिसीव नहीं किया, अब दीपक बहुत परेशान था, और शाम भी होते जा रहा था, और उसे घर भी लौटना था, यह सोचकर वह बहुत परेशान था, लास्ट समय तक यह सोचते रहा अब आएगी, अब आएगी, मगर अनन्या नहीं आई, फिर वह वहां से अपने बहन के घर चले चला गया,

और अपने बहन को अनन्या की फोटो दिखाकर दीपक बोलता है कि मैं किसी लड़की से शादी करूंगा, तो उसकी बहन दीपक के मोबाइल में से अनन्या नाम से सेव नंबर पर कॉल कर देती है, और जब अन्यान्य का भाभी कॉल उठाती है तो कहती है कहती है की दीपक को दामाद बनाओगी, इतना सुनते हैं उसकी भाभी अनन्या का भैया से बोल देती है कि अनन्या एक फोटो दीपक को दे दी है, और दीपक का बहन दमाद बनाने के लिए उल्टा- पलटा बोल रही थी,

इतना सुनकर अनन्या को उसकी भैया बुलाते हैं, और उसे बिना कहे-सुने मार-पीट देते हैं,क्योंकि, अनन्या के माता पिता उसे नौकरी वाले लड़के से शादी करना चाहते थे / वो भी सरकारी स्कूल के मास्टर से, जब यह बात दीपक को पता चलता है तो वह बहुत तन मन से पढ़ाई करता है, मगर दीपक को यह बात पता नहीं था कि सरकारी स्कूल के मास्टर बनने के लिए बी.ई.डी,एम.ए.डी करना पड़ता है, जिसके लिए उसके पास पैसा नहीं था, फिर क्या था वह अनन्या को धीरे-धीरे भूलने की कोशिश कर रहा है/

कुछ दिन बाद जब दीपक घर पहुंचता है तो अनन्या का फोन आती है और अन्नया कहती है सॉरी दीपक मैं उस दिन नहीं आ सका, क्योंकि मैं किसी और काम से दूसरे जगह चला गया था, इसके लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूं/

मगर फिर क्या तब तक तो बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि दीपक बहुत उसका इंतजार कर लिया था, और वह फिर किसी लड़की पर विश्वास नहीं करता था, फिर कुछ दिन बाद दीपक का शादी हो गया और वह खुशी-खुशी अपना जीवन बिताने लगा /

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